Connect us on YouTube Connect us on FACEBOOK Subscribe RSS      || जय श्री साईं ||
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भारत में साईं धारा प्रवाह

पूजनीय गुरुजी सन्‌ १९८९ में शिरडी साईं द्वारा आकर्षित हुए और तब से श्री गुरुजी विश्व साईं आंदोलन का , नेतृत्व कर रहे हैं। श्री गुरुजी से प्रेरणा पाकर एवं उनके मार्ग दर्शन में शिरडी साईं के २१८ मंदिर देश विदेश में तामीर किए जा चुके हैं जो कि शिरडी साईं का संदेश ‘श्रद्धा’ और ‘सबुरी’ को घर घर पहुंचा कर मानवता का पाठ , विश्व को दिखा रहे हैं।

श्री गुरुजी के नेतृत्व में आज देश के छोटे से छोटे स्थान एवं सुदूर प्रांतों में भी जैसे कि असम, अंडमान, कोलकाता, जम्मू, दहेज़ इत्यादि में शिरडी साईं के मंदिर निर्मित हो चुके हैं ,जो भारत में श्री शिरडी साईं द्वारा प्रतिपादित संदेशों की प्रति जागरुकता एवं उनके भक्तों को , शिरडी साईं के मंदिर में , भक्तों को ,सतसंग एवं मानवता की माला में गूंथने का अनुपम प्रयास है।

आज भारत की अध्यात्मिक पृष्ठभूमि श्री गुरुजी के मार्गदर्शन परिणामतः निर्मित मंदिरों से पल्लवित है और शिरडी साईं के अरबों भक्तों के उद्‌घोष से उल्लासित है। यह जन सैलाब को अक्सर आप , आज शिरडी में दिनों दिन बढ़ती दर्शनार्थी की भीड़ में देखते हैं । श्री गुरुजी के दिशा निर्देशन में निर्मित २५० मंदिरों से , असंखय जनमानस शिरडी साईं के मानवता के संदेश, शुद्ध आचरण, सहिष्णुता, श्रद्धा और सबूरी से जुड़ बेहतर अध्यात्मिक मार्ग की तरफ बढ़ निकलें हैं जो कि श्री गुरुजी के परिश्रम का मुख्य उद्‌देश्य है। श्री साईं के निर्मित यह मंदिर , सही मायनों में , अपनी सामरिक गतिविधियों एवं प्राकृतिक आपदाओं के दौरान दी गई मुफ्त सेवा इत्यादि के आयोजन से , मानवता का अर्थ / राह दर्शाते हैं। शिरडी साईं के ये मंदिर ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के सिद्धांत को अपनाते हैं और समय समय पर रक्त दान शिवर, चिकित्सा शिवर, मुफ्त चैरिटेबल अस्पताल, पशुओं के लिए चिकित्सालय सुविधा इत्यादि की सेवा प्रदान करते हैं।

श्री गुरुजी ने ,विश्व साईं आंदोलन को, एक महत्‌ अध्यात्मिक उर्जास्रोत के रूप में परिणित कर, प्रत्येक साईं भक्त के दैनिक जीवन में, और दैनिक जीवन शैली से जुड़े हर आयाम में , शुद्ध आचरण अपनाने पर बल/सीख देते हैं जो कि शिरडी साईं द्वारा दिखाई गयी राह है। श्री गुरुजी प्रत्येक भक्त को श्री शिरडी साईं के ‘श्री साईं सत्‌ चरित्र’ को नियमित पढ़ने की सीख देते हैं ताकि श्री साईं चरित्र में लिखे बाबा के मार्ग/वचन उनकी अध्यात्मिक पिपासा को शांत कर एवं बाबा के वचनों को , जन मानस अपने जीवन शैली में उतार, अध्यात्मिक प्रगति करें।

अर्द्ध कुंभ मेला और पूर्ण कुंभ मेले में, श्री गुरु जी के मार्ग दर्शन में शिरडी साईं के कैंप लगाए जाते हैं ताकि कुंभ मेले में देश विदेश से आने वाले असंखय भक्तों में, जिनमें से कई भक्त श्री शिरडी साईं से अनभिज्ञ भी हैं, उन्हें श्री शिरडी साईं के बारे में जानकारी मिले और सभी भक्त श्री शिरडी साईं के सानिध्य में , कुंभ के पावन अवसर का सदुपयोग , अध्यात्मिक उत्थान के लिए करें। श्री गुरुजी द्वारा प्रेरित इन कैंपों में ,हजारों श्रद्धालु श्री शिरडी साईं से परिचित होते हैं व कैंप में होने वाले भजन, कीर्तन, प्रवचन, से आनंदित, श्री शिरडी साईं के श्रद्धा और सबुरी वचनों में आश्रय पाते हैं।

इसके अलवा देश के भिन्न शहरों में मसलन भुबनेश्वर , दिल्ली आदि में आयोजित पुस्तक  मेलों / किताब प्रदर्शनियों में श्री शिर्डी साईं के जीवन एवं दर्शन  सम्बन्धी  पुस्तकों का स्टाल लगाया जाता है ताकि साधारण जन मानस को सरल-सहज भाषा में श्री शिर्डी साईं सम्बन्धी जानकारी हासिल हो सके। आदि काल से पुस्तकों के व्यापक प्रभाव को हमारे शिक्षक/ऋषि मुनि मानते आयें हैं और श्री शिर्डी साईं के विचारों की अध्यात्मिक धरोहर को जनमानस तक पहुंचाने का  पुस्तकें एवं संगीत एक सशक्त माध्यम हैं ।

श्री गुरुजी शिरडी साईं के मानवता, शुद्ध आचरण के संदेश, प्रेम, श्रद्धा, सबुरी के संदेशों को कोने कोने तक पहुंचा कर, श्री शिरडी साईं द्वारा दिखाई गई ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की राह को साकार करते हुए, अध्यात्मिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त करते हैं । इस दिशा में, श्री गुरुजी से प्रेरणा ले कर शिरडी साईं के विचारों के प्रसार हेतु, विभिन्न भारतीय भाषाओं में जैसे हिंदी, तेलुगु, मराठी, उड़िया, असमिया, अंगरेजी, इत्यादि में अनेकों अध्यात्मिक पत्रिकाएं प्रकाशित की जा रही हैं। आज भारत ही नहीं अपितु विश्व में, श्री शिरडी साईं से संबंधित उपलब्ध साहित्य में आई अचानक वृद्धि का कारण , श्री गुरुजी द्वारा नेतृत्व किया जा रहा विश्व साईं आंदोलन है , जिससे अरबों की तादाद में लोगों के मन में शिरडी साईं के प्रति श्रद्धा, उत्सुकता, भक्ति का विकास हुआ है और यह पत्रिकाएं इसी भक्ति को आगे बढ़ाती हैं। श्री शिरडी साईं के यह मंदिर, लोगों के आस्था स्थल हैं और उन्हें स्वयं के अंदर देखने के लिए प्रेरित करते हैं। आज अनेकों वेबसाइट श्री गुरुजी से दिशा निर्देश प्राप्त कर श्री शिरडी साईं के संदेश का प्रचार करने में संलग्न हैं।

श्री गुरुजी द्वारा रचित और संगीत बद्ध किए गीत म्यूजिक सीडी ‘Living with Sai’ (साईं के साथ) और ‘तुभ्यम्‌ नमामि्‌’ (साईं महामंत्र), “AAO SAI”, “Shri Sai Nathaya Namaha Namaha”, “Sai Melodies” इत्यादि श्रद्धालुओं को शिरडी जाने के लिए प्रेरित करते हैं और सद्‌गुरू श्री साईं बाबा के नाम और उनके दिखाए मानवता के मार्ग का प्रचार करते हैं।

आज श्री शिरडी साईं के आशीष से भारत के प्रत्येक शहर में, जैसे कि जम्मू, कांगरा, पीलीभीत, गुवाहाटी, अंडमान, देहली, मुरादाबाद, इलाहाबाद, सूरत, अजमेर, चेन्नई, अहमदनगर, गुड़गांव, संबलपुर, हुबली, कोलकाता, भोपाल इत्यादि में श्री शिरडी साईं के मंदिर असंखय भक्तों को मानवता की माला में पिरोते हैं और साईं भक्त मिल बैठ मानवता पर आधारित, शुद्ध आचरण से निखारी हुई, श्रद्धा, सबुरी से अध्यात्मिक उत्थान की तरफ बढ़ रहे हैं।

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