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नसविल्ले , अमरीका में महाप्रभु जगन्नाथ जी की रथ यात्रा; गुरूजी द्वारा छेरा पहंरा संपन्न

सम्पूर्ण जीवन- सार के प्रतीक हैं महाप्रभु जगन्नाथ: श्रद्धेय गुरूजी

श्री जगन्नाथ सोसाइटी ऑफ अमरीका, नसविल्ले द्वारा महाप्रभु जगन्नाथजी की रथ यात्रा अत्यंत उत्साह के साथ पारंपरिक विधि अनुसार महाप्रभु जगन्नाथ के भक्तों के बीच मनाई गयी | इस अवसर पर आयोजित सभा में श्रद्धेय गुरूजी श्री चन्द्रभानु सतपथी जी मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित थे ; श्रद्धेय गुरूजी श्री चंद्रभानु सतपथी जी ने श्रदालुओं को संबोधित किया |

प्रातः काल , असंख्य श्रद्धालुओं द्वारा महाप्रभु की पूजा-अर्चना की गयी | दोपहर को, श्री जगन्नाथ सोसाइटी ऑफ अमरीका, नसविल्ले के सदस्यों ने पूज्य गुरूजी श्री चंद्रभानु सतपथी जी के आगमन पर उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत कर उन्हें महाप्रभु गर्भ-गृह तक ले गए | ओडिशा के विख्यात गायक शांतनु महापात्रजी और गायिका संगीता गोसाईंजी के मोहक भजन मंत्रो के उच्चारण के बीच श्री गुरूजी ने महाप्रभु जगन्नाथजी की विधि पूर्वक पूजा की जिससे की श्रदालुओं में अध्यातमचेतना – भक्ति भावना के संचार से समस्त परिवेश जाग्रत हो उठा |

इसके बाद पहंडी विधि-रीति अनुसार , भक्तों ने महाप्रभु जगननाथ जी, देवी सुभद्रा, श्री बलराम जी की चल- प्रतिमा को पारंपरिक भजन, ताल, ढोल, मंजीरे के बोलों / गूंज के साथ उनके रथों पर विराजित किया | श्रद्धेय गुरूजी ने रथ को खिचे जाने से पूर्व महाप्रभु जगननाथ जी, देवी सुभद्रा, श्री बलराम जी के रथ समक्ष विधि- अनुसार “छेरा पहंरा” रस्म संपन्न की | उसके उपरांत वहां उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्री गुरूजी ने जगन्नाथ धर्म और दर्शन के बारे में सारगर्भित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की | उन्होंने कहा की जगन्नाथ धर्मको समझने के लिए , पहले जगन्नाथ धर्म की दिव्यता ,महानता , सार्वभौमिकता , ब्रह्माण्ड व्यापी विशाल रूप को दर्शाने वाले अध्यातम- दर्शन को समझना होगा | पृथवी में सभी धर्मों में ईश्वर के बारे में कुछ न कुछ प्रचिलित मान्यताएँ हैं जो कि सभी धर्मों में सामान रूप से विद्यमान हैं | वह चाहे किसी भी धर्म के व्यक्ति क्यों न हो , सभी मतों में सदियों से इंसान मानता (आ) रहा है कि समस्त चराचर जगत के ऊपर एक सर्वोच्च शक्ति /( परम) पुरुष विद्यमान हैं , जो कि ब्रह्माण्ड कर्ता है | उनको (सर्वोच्च शक्ति /( परम पुरुष) को परब्रह्म,ईश्वर या अल्लाह इत्यादि अनेकों नामों से भिन्न मत में भिन्न – भिन्न रूप से वर्णित किया गया है | सृष्टि के आरम्भ से ही मनुष्य इस मान्यता को सत्य मानता रहा हैं कि सभी जड़ -जीव के सृजन कर्ता इश्वर हैं और जन्म-मृत्यु के चक्र पूर्ण होने के उपरांत समस्त सृजित जड़- जीव उन्ही (इश्वर ) में समाविष्ट हो जातें है ; मनुष्य इसी सत्य की खोज में सलग्न है | भगवान की सत्ता सिर्फ एक ही ग्रह या विश्व तक सीमित नहीं है अपितु कोटि-कोटि ग्रह, सौर मंडल , नक्षत्र , आकाश गंगा , तारे इत्यादि समस्त चाराचार ब्रह्माण्ड के नियंत्रक कर्ता , इश्वर / परम पुरुष ही हैं जो सारे संसार के सृजन- नियंत्रक ( कर्त्ता) हैं | महाप्रभु जगन्नाथजी समग्र ब्रह्मांड के नियंता हैं | इसलिए वह सिर्फ पुरी में ही नहीं वरन समस्त ब्रह्माण्ड में विद्यमान हैं | ओडिशा के धर्म, संस्कृति – सामाजिक परम्परा मान्यताओं, ललित कला , चित्रपट, साहित्य, स्थापत्य आदि प्रत्येक क्षेत्र में महाप्रभु जगन्नाथजी की परम सत्ता सुस्पष्ट है | वास्तव में महाप्रभु जगन्नाथजी सम्पूर्ण जीवन (शैली) के आधार व् प्रतीक हैं |

जगन्नाथ धर्म के इतिहास के ऊपर अपने विचार प्रकट करते हुए श्री गुरूजी ने कहा कि जगन्नाथ धर्म भागवत धर्म नहीं है वरन भागवत धर्म , जगन्नाथ धर्म का एक अंश है | उसी प्रकार विष्णु धर्म, शैव धर्म या शक्ति मत इत्यादि धर्म ही नहीं वरन अन्य मत भी जगन्नाथ धर्म के अंश विशेष हैं | मसलन नीलमाधव,बुद्ध धर्म, जैन, आर्य धर्म भी जगन्नाथ धर्म के अंश विशेष हैं | जगन्नाथ धर्म सबसे प्राचीन धर्म हैं और समस्त धर्म पथों के मिलन का केंद्र बिंदु | महाप्रभु जगन्नाथ जी अर्ध्नागेश्वर के प्रतीक रूप हैं | महाप्रभु जगन्नाथजी सगुण और निर्गुण रूपी हैं |

श्री गुरूजी चन्द्रभानु सतपथी जी के इस हृदय स्पर्शी संभाषण के बाद भिन्नक्षम नृत्यगुरु नित्यानंद दास और उनके सहयोगी विजय दास ने ओडिशी नृत्य “पंगु लंघयते गिरीं” प्रस्तुत किया | कार्यक्रम के अंत में श्री गुरूजीको सम्मानित किया गया | अभिवादन स्वीकारते हुए श्री गुरूजी ने उपस्तिथ भक्तों को श्री जगन्नाथ जीवन पद्धिति(शैली) पर गहन शोध की आवश्यकता पर बल दिया | श्री गुरूजी चन्द्रभानु सतपथी जी ने भिन्नक्षम नृत्य गुरु नित्यानंद दास के कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण हेतुआर्थ आर्थिक सहायता की घोषणा की जिसका दर्शकों ने तालियों से स्वागत किया | अंत में मनोज शतपथी ने धन्यवाद -प्रस्ताव दिया | अनुष्ठान के कार्यकर्त्ता प्रवीर दास और पंचानन शतपथी ने उत्सव की परिचालना की | इस उत्सव में अमरीका और केनडा से हजारों भक्तों शामिल हुए थे |

Source: THE SAMAJ

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