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महाकाव्य भक्ति ग्रन्थ “श्री गुरु भागवत” के प्रथम खण्ड(हिंदी अनुवाद) एवं साईं मंत्र CD “श्री साईं नाथाय नमः नमः” विमोचन समारोह

४ अक्टूबर २०११ , मंगलवार के पावन अष्टमी उत्सव की सायं बेला में गुडगाँव  स्तिथ साईं का आंगन मंदिर में  असंख्य साईं भक्तों की उपस्तिथि  में पूज्य गुरूजी  श्री चन्द्रभानु सतपथी  जी  द्वारा रचित मूल ओडिआ महाकाव्य भक्ति ग्रन्थ “श्री गुरु भागवत -प्रथम खण्ड” के  हिंदी अनुवाद  एवं श्री शिर्डी साईं मंत्र  CD -”श्री साईं नाथाय नमः नमः” का आकर्षक विमोचन समारोह संपन्न हुआ |

विमोचन सामरोह का शुभआरंभ श्री शिर्डी साईं के समक्ष नत मस्तक हो आशीष  ग्रहण कर, श्री अमूल्य रत्न नंदजी द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्वलित कर किया गया | तदुपरांत उपस्तिथ भक्तों को श्री गुरु भागवत पर आधारित एक विस्तृत वृतचित्र दिखाया गया जिसमे गुरु भागवत की महिमा, श्री गुरूजी के  वचन  एवं गुरु तत्व सम्बन्धी महत्वपूर्ण   जानकारी  प्रदान की गयी |

श्री नंद ( भ. प्र .से.)(retd.) ने  महाकाव्य भक्ति ग्रन्थ ” श्री गुरु भागवत -प्रथम खण्ड ” के  हिंदी अनुवाद का लोकार्पण करते हुए कहा कि “श्री गुरु भागवत ” अमूल्य भक्ति अध्यात्मिक धरोहर है और श्री गुरूजी श्री शिर्डी साईं के  अंकित संतान हैं  | उन्होंने कहा कि प्रत्येक भक्त को इस महान महाकाव्य ग्रन्थ “श्री गुरु भागवत” का पठन- मनन करना चाहिए ताकि वे शिर्डी साईं के पथ पर आरूढ़ हो सकें | “श्री गुरु भागवत” में १६००० पंक्ति नवाक्षरी छंद में हैं |  प्रथम खण्ड में ४००० पंक्ति हैं | ज्ञातव्य रहे कि श्री गुरूजी श्री चन्द्रभानु सतपथीजी  को ओडिआ महाकाव्य ग्रन्थ ” श्री गुरु भागवत” के लिए प्रथम  ”महापुरुष श्री जगन्नाथ दास सम्मान” से सम्मानित किया गया |

प्राचीन काल से हमारे ऋषियों -मुनियों महापुरुषों  ने जाना एवं माना कि महापुरुषों  क़ी रचना/ लेखनी एवं वाणी में उनकी शक्ति गुप्त रूप से समाहित रहती है जो उनके पाठकों -भक्तों के चित्त शुद्धि एवं आत्म  बोध के मार्ग को प्रशस्त करने में सक्षम एवं सहायक  है |

इस अवसर पर श्री गुरूजी चन्द्रभानु सतपथीजी  ने अपने  विडियो सन्देश के ज़रिये भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि “श्री गुरु भागवत” कि रचना उनके अंतःकरण से स्वत: स्फुरित हुए शब्दों से हुई जो कि नवाक्षरी शब्दों के प्रारूप में थे ;पद्य का नवाक्षरी छंद  प्रारूप ओडिआ साहित्य में कई सौ वर्षों पूर्व  से पाया जाता है | श्री गुरूजी ने कहा कि अनेकों  अमूल ओडिआ निवासी भक्तों एवं जन साधारण के अनुरोध पर मूल ओडिआ महाकाव्य भक्ति ग्रन्थ ” श्री गुरु भागवत” का हिंदी अनुवाद प्रकाशित किया गया ताकि गुरु-भक्ति मार्ग और उनके सिद्धांतों के तत्व का सही रूपांकन कर, अनेकों भक्तों को श्री साईं और बृहत् चैतन्य का आत्म -बोध हो सके | प्राचीन काल से ही अध्यात्मिक  प्रगति  एवं चित्त शुद्धि हेतु आध्यात्मिक  ग्रंथो-पोथी आदि के  नियमित  पठन-मनन पर  बल दिया जाता आ रहा  है; श्री शिर्डी साईं ने भी अपने भक्तो को उनकी अध्यात्मिक प्रगति हेतु अनेकों (भक्तों) को उनके आवश्यकता अनुरूप भिन्न अध्यात्मिक ग्रन्थ के वचन-पठन-श्रवण करने कि सलाह दी, जैसे कि श्री साईं चरित्र में वर्णित है |

श्री गुरूजी ने कहा कि अध्यात्मिक मार्ग पर चलने के लिए आपको  यह जानना आवशयक है कि सद्गुरु एवं पाखंडी गुरु  को परखने के क्या-क्या लक्षण हैं ताकि हम इस मार्ग में पाए जाने वाले आडम्बरी गुरुओं से सावधान रह सकें  |  प्रथम खण्ड में गुरु के भिन्न -भिन्न  प्रकार ( जैसे साधू, सन्यासी, प्रभु प्रेमी , जोगी, भ्रष्ट योगी,  योग भ्रष्ट जोगी आदि -आदि), भक्तों के प्रकार- उनके लक्षण (सुभक्त, कुभक्त आदि ), दीक्षा (के भिन्न प्रकार–स्पर्श, चक्षुषी , गुप्त आदि–दीक्षा विधि आदि), अंकित संतान लक्षण , भक्ति , शिष्य द्वारा श्री गुरु से प्रश्न, आज्ञा पालन, गुरु सिद्धांत आदि जैसे अनेकों गूढ़ विषयों पर सरल-सहज मधुर नवाक्षरी छंद शैली में विभिन्न उपशीर्षक-शीर्षक के अंतर्गत रचित है जो कि प्रत्येक गुरु-शिष्य परंपरा पथ के पथिक के लिए महत्वपुर्ण दिग्दर्शक है | श्री गुरूजी ने इस अवसर पर कहा कि जीवन सार है और इस(के) सार को ग्रहण करना हमारा ध्येय है | उन्होंने कहा कि हमारा अस्तित्व सत्य है, इश्वर सत्य है, जीव सत्य है और  माया भी सत्य है |  हमें जीवन सार  सत्य को पाना है |  श्री गुरूजी ने कहा कि श्री गुरु भागवत ४ स्कन्द में रचित ग्रन्थ है और इस ग्रन्थ के पठन -परायण क़ी विधि एवं लाभ  सम्बन्धी जानकारी  चतुर्थ खण्ड के अंतिम अध्याय  में वर्णित है –(पोथी के नियमित परायण-पठन से– विशेषकर गुरुवार,पूर्णिमा,एकादशी ,शिवरात्रि आदि के पावन अवसर पर — भक्तों को महापुण्य का लाभ मिलेगा एवं उनके ह्रदय -चित्त कि वृति  शांत -दृढ हो , प्राण इश्वर उन्मुख होंगे और उन्हें श्री गुरु का तदात्मयता प्राप्त होने में सहायक सिद्ध होगी | )

इसी पावन  अवसर पर RPG-गोयनका समूह द्वारा सयंत सा-रे-गा-मा म्यूजिक कंपनी द्वारा निर्मित  “श्री साईं नाथाय नमः नमः” को जारी किया गया ; सा-रे-गा-मा म्यूजिक कंपनी संगीत कला क्षेत्र की सबसे बड़ी एवं पुरानी कंपनी है (पहले HMV के नाम से जानी जाती थी) |  इसके पहले उपस्तिथ भक्तों क़ी करतल ध्वनी के बीच घोषणा क़ी गयी कि शिर्डी साईं मंत्र म्यूजिक CD ” श्री साईं नाथाय नमः नमः “  को श्री शिर्डी साईं मंदिर, शिर्डी में , शिर्डी  संसथान ट्रस्ट के अधिकारी एवं  सदस्यश्री मोरे, श्रो शेलके आदि ने श्री शिर्डी साईं के चरणों में ३ अक्टूबर २०११ को अर्पण किया |

मंत्र म्यूजिक CD “ श्री साईं नाथाय नमः नमः” के अति मधुर, कर्णप्रिय विस्मृत करने वाले बोल – संगीत  को स्वर, संगीत एवं शब्द स्वयं श्री गुरूजी  चन्द्रभानु सतपथीजी  ने प्रदान किये हैं | उपस्तिथ श्रोताओं को श्री गुरूजी द्वारा रचित-संगीतबद्ध एवं  उन्ही क़ी अंतर्मन को छु लेने वाली मोहक मुखरित स्वर के इस नवीनतम संगीतमय CD ” श्री साईं नाथाय नमः नमः” के गीत सुनने का सुअवसर प्राप्त हुआ  जिससे समूचा वातावरण आनंदित -हो उठा | श्री गुरूजी के   मधुर धुन-बोल  पर   अपने भावपूर्ण नृत्यकला  से   कुमारी अहाना राय ने  भक्ति के तत्वों को दर्शाने का कौशल्तापूर्ण प्रदर्शन किया  | इस अनुपम मंत्र म्यूजिक CD ” श्री साईं नाथाय नमः नमः ” में श्री साईं नाथ पर आधारित चार मंत्र हैं जो उनके आराधना में  आपको इश्वरियता के दर्शन करने में सक्षम हैं |

नवीनतम मंत्र म्यूजिक CD “श्री साईं नाथाय नमः नमः” के  विषय पर श्री गुरूजी ने बताया कि प्राचीन काल से मंत्रों क़ी शक्ति द्वारा इश्वर का  सामीप्य प्राप्त करने की प्रथा रही है ; मन्त्रों के शब्दों से उठे स्पंदन से जीव ही नहीं , सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड स्पंदित हो उठता  है जो की नाद -कला-साधना का सशक्त प्रारूप   है |   मंत्र इश्वर को जानने का सशक्त माध्यम है और इस मंत्र म्यूजिक CD के शब्द, धुन इसी प्राचीन धरोहर की श्रंखला है |

इस ख़ुशी के मौके पर सा-रे-गा-मा के अधिकारी श्री आदर्श गुप्ता ने कहा कि “श्री साईं नाथाय नमः नमः”  CD  का सम्पूर्ण कार्य चार हफ़्तों में पूरा किया गया एवं यह सा-रे-गा-मा कंपनी  का सौभाग्य है कि श्री गुरूजी ने उनके अनुग्रह  को स्वीकार करते हुए , श्री “साईं नाथाय नमः नमः” CD के सभी चार मन्त्र-गीतों को अपने भावपूर्ण  पवित्र  दिव्य शक्तिगुणसंपन्न  स्वर से मुखरित किया है जो यक़ीनन हर सुनने वाले के जीवन में, उनके घर में दिव्यता का संचार करेगी |   इस ख़ुशी के मौके पर श्री गुरूजी ने अपने संबोधन के अंत में कार्यक्रम से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को धन्यवाद एवं आशीर्वाद दिया |

इस कार्यक्रम की सूत्रधार श्रीमती ज्योत्स्ना थीं ; अनेक गणमान्य व्यक्ति इस शुभ अवसर पर उपस्तिथ थे |   कुमारी खेर ने अपनी नृत्यकला से दर्शकों समक्ष गुरु वंदना प्रस्तुत क़ी |  समस्त कार्यक्रम का आनंद  समूचे विश्व में साईं भक्त सीधे इन्टरनेट प्रसारण www.livestream.com/sundaysaisatsang के माध्यम से (देख) पा रहे थे |

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