बच्चों के साईंबाबा |
श्री शिरडी साईं बाबा भारत के प्रखयात संत हैं। वे शिरडी नामक एक छोटे से ग्राम में रहते थे । शिरडी आज महाराष्ट्र राज्य में स्थित, गोदावरी नदी के तट के समीप बसा एक नगर है।
श्री शिरडी साईं बाबा को लोग आदर पूर्वक ”बाबा” कह कर के संबोधन करते हैं, बाबा मायने – ”पिताजी”।
श्री शिरडी साईं बाबा अक्सर नीम वृक्ष की छांव में, शिला पर बैठते थे, जो उनके अनुसार वह उनके गुरु का स्थल है।
श्री शिरडी साईं बाबा ने भाईचारा का पाठ पढ़ाया और वे लोगों को श्रद्धा एवं सबुरी अपनाने की सीख देते हैं। साईं बाबा ने कभी भी जाति वर्ग, धर्म, भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं किया।
श्री शिरडी साईं ने अपने जीवन काल में अनेकों चमत्कार दिखाए – जैसे कि पानी से दीप जलाना, बीमार लोगों को रोग मुक्त करना और भविष्य वाणी आदि करना।

श्री शिरडी साईं को दिया प्रज्ज्वलित करना, फूलों के पौधे लगाना, उन्हें सींचना प्रिय था; वे रामनवमी, दीपावली, जन्माष्टमी इत्यादि पर्व मनाते थे।
बच्चे अक्सर श्री शिरडी साईं बाबा को उनके जीवन काल में घेरे रहते क्योंकि साईं बाबा सभी से प्यार करते थे। साईं बाबा अपने भक्तों के लिए स्वयं भोजन बनाते और उन्हें लोगों/भक्तों को भोजन खिलाना अच्छा लगता था। भोजन में वे अक्सर खिचड़ी बनाते जो की दाल और चावल को मिश्रित कर के बनाया जाता है।
श्री शिरडी साईं ने सबके प्रति प्रेम का मार्ग दिखाया । श्री शिरडी साईं सभी मानवों के परम पिता हैं! आज, शिरडी में, श्री शिरडी साईं बाबा के समाधि स्थल पर आदर एवं सुमन अर्पित करने हेतु, आप भक्तों की लम्बी कतार देख सकते हैं।
आइए, हम सब महान संत श्री शिरडी साईं बाबा को अपना सादर प्रणाम एवं श्रद्धा सुमन अर्पित करें।
!! ओम साईं राम!!
श्री शिर्डी साईंबाबा |
|
श्री गुरूजी |
|
श्री शिर्डी साईं पीठ,बारीपदा |
|







श्री शिरडी साईं बाबा – एक फकीर, जो कि अहमदनगर जिले के शिरडी नामक एक छोटे से गांव में अवत्तीर्ण हुए ,शिरडी साईं बाबा के पैतृक
श्री चंद्रभानु सतपथीजी स्वयं को श्री शिरडी साईं का महज एक चाकर मानते हैं - वे शिरडी साईंबाबा के द्वारा सिखाए गये मानवता
१४ अप्रैल २००१ के दिन पूजनीय गुरुजी ने, बारीपदा (उड़ीसा) में , श्री शिरडी साईं पीठ मंदिर का उद्घाटन किया। इससे पहले,