मंदिर का इतिहास |
संस्थान का गठन :
श्री शिरडी साईं कृपा संस्थान, बरीपदा की स्थापना सन् १९९८ में, पूजनीय गुरुजी श्री चंद्रभानु सतपथीजी, श्री सुरेश पाण्डा व अन्य साईं भक्तों की उपस्थिति में हुई। उस समय बरीपदा नगर में कोई भी शिरडी साईं का मंदिर नहीं था। प्रत्येक गुरुवार की शाम को, शिरडी साईं बाबा के कुछ भक्त श्री गुरुजी के निवास पर एकत्रित हो, श्री साईं की आरती, कीर्तन भजन आदि करते थे । यह सिलसिला, सन् २००० तक ऐसे ही जारी रहा। आरंभ में , श्री शिरडी साईं कृपा संस्थान, बरीपदा के, कुछ एक ही सदस्य थे, जो कि बाद में बढ़ते-बढ़ते ६० से भी अधिक हो गए।
भूमि भूजा
बहुत अंतराल बाद की गई सन् २००० में अपनी बरीपदा यात्रा के दौरान, श्री गुरुजी ने उपस्थित बरीपदा के भक्तों से, उनकी इच्छा जाननी चाही। एकजुट हो, सभी भक्तों ने कहा, ‘श्री साईं का मंदिर’; श्री गुरुजी ने उत्तर में कहा – ‘OK.’
श्री गुरुजी ने बरीपदा की अपनी उत्तरगामी यात्रा के दौरान मंदिर निर्माण हेतु भूमि पूजन किया। आप फोटो दिर्घा में भूमि पूजा समारोह के चित्र देखने के लिए यहाँ क्लीक करें।
भुबनेश्वर के श्री बी.के. साहू के भूमि पूजा समारोह से संबंधित, उनके अनुभव ‘साईं बाबा दर्शन’, नामक पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। आप उनके अनुभव यहाँ क्लीक करके पढ़ सकते हैं।
भूमि पूजा समारोह के उपरांत और मंदिर के उद्घाटन होने तक, साईं बाबा की साप्ताहिक पूजा अर्चना श्री गुरुजी के निवास की बजाए, अब मंदिर के प्रांगण में निर्मित एक अस्थायी कमरे में होती रही। श्री साईं सेवा ट्रस्ट, नई दिल्ली की बरीपदा शाखा इस मंदिर के कार्यभार की देखभाल करती है व श्री गुरुजी चंद्रभानु सतपथीजी इस मंदिर के प्रमुख संरक्षक हैं। श्री शैलेंद्र सेठ इस मंदिर के मुखय प्रबंधक ट्रस्टी हैं। श्री शांतनु सतपथी इस मंदिर के सचिव हैं।
श्री शिर्डी साईंबाबा |
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श्री गुरूजी |
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श्री शिर्डी साईं पीठ,बारीपदा |
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श्री शिरडी साईं बाबा – एक फकीर, जो कि अहमदनगर जिले के शिरडी नामक एक छोटे से गांव में अवत्तीर्ण हुए ,शिरडी साईं बाबा के पैतृक
श्री चंद्रभानु सतपथीजी स्वयं को श्री शिरडी साईं का महज एक चाकर मानते हैं - वे शिरडी साईंबाबा के द्वारा सिखाए गये मानवता
१४ अप्रैल २००१ के दिन पूजनीय गुरुजी ने, बारीपदा (उड़ीसा) में , श्री शिरडी साईं पीठ मंदिर का उद्घाटन किया। इससे पहले,