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बारिपदा का साईं पीठ

बारीपदा, बुढाबलंग नदी के तट पर बसा, ओड़िसा राज्य के मयूरभंज जिले का मुख्यालय  है। भारत में १/१/४९ के विलय पूर्व, बारीपदा भंज शासकों के शासन काल में, कई सदियों से उनकी राजधानी रही। विलय पूर्व, मयूरभंज राज के शासक , भंज वंश के राजा थे। इन में महाराजा श्री राम चंद्र भांज अपनी प्रजा में अपने सद्‌व्यवहार व उनके प्रति पिता तुल्य व्यवहार के लिए प्रिय थे एवं जाने जाते थे। उन्होंने मयूरभंज राज में ब्रह्‌म समाज की स्थापना की। मयूरभंज राज के सभी राजा/शासक धर्मनिष्ठ थे व अध्यात्म में दिलचस्पी रखते थे। ”किचिका देवी” मयूरभंज शासकों/राजाओं की कुल देवी हैं। ऐसा माना जाता है, कि पांच पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान मयूरभंज में रहे थे। देवी अंबिका मयूरभंज की आराध्य देवी हैं। बरीपदा में निकाली जाने वाली श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा, विश्व की दूसरी सबसे बड़ी एवं विखयात रथ यात्रा है, व इस रथ यात्रा का महत्व पुरी में होने वाली श्री जगन्नाथजी की रथ यात्रा के समान/समकक्ष है, जिसे देखने के लिये असंखय भक्त आते हैं। यह कहा जाता है कि भंज राजाओं की मर्यादा रखने के लिए एवं मयूरभंज राज की शान रखने के लिए श्री जगन्नाथजी बारीपदा में रहते हैं। इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि मयूरभंज जिले के लोग प्राचीन काल से, सांस्कृतिक-धार्मिक- अध्यात्मिक धरोहर के , धनी रहे हैं।

एक ऐसे पवित्र अध्यात्मिक स्थल की चाह जहाँ किसी भी धर्म/रीति रिवाजों के बंधन न हों, १४ अप्रैल २००१ की पावन बेला में साकार हुईं जब मयूरभंज के दिव्य पुत्र पूजनीय गुरुजी श्री चंद्रभानु सतपथीजी ने अपने पावन कर कमलों से श्री शिरडी साईं बाबा के पवित्र मंदिर का उद्‌घाटन किया। शिरडी साईं बाबा सभी प्राणियों के प्रति अपने आद्वितीय मानवता, सहिष्णुता, करुणा और प्रेम के तत्त्व संदेशों के लिए विखयात हैं।

१४ अप्रैल २००१ के दिन पूजनीय गुरुजी ने, बारीपदा (उड़ीसा) में , श्री शिरडी साईं पीठ मंदिर का उद्‌घाटन किया। इससे पहले, ज्ञातव्य रहे कि १४ अगस्त २००० को श्री गुरुजी ने इसी मंदिर के लिए भूमि पूजन किया था; चमात्कारिक रूप से महज एक दिन के कार्य समय में मंदिर के निर्माण कार्य हेतु भूमि रजिस्ट्रेशन संबंधी सभी सरकारी कार्यवाही पूरी करीं गयीं (पढ़िए श्री बिजोय.के.साहू का अनुभव)। श्री भवानी मिश्रा, जो इस पवित्र मंदिर के शिल्पकार हैं, ने अत्यंत रुचित्मक शैली में इस मंदिर का वास्तु शिल्प बनाया है। मंदिर के मुखय द्वार पर दो द्वारपाल/प्रहरी स्थापित हैं जो मंदिर के वास्तु कला को भव्य रूप देते हैं।

स्वर्गीया श्रीमती हर्षमयी सतपथीजी (श्री गुरुजी की आदरणीय माताजी) एवं उनके परिवार ने श्री शिरडी साईं बाबा मंदिर के निमाण हेतु जमीन दान में प्रदान की। श्री साईं सेवा ट्रस्ट, नई दिल्ली की बरीपदा शाखा इस मंदिर के कार्यभार को संभालती है व श्री गुरुजी सतपथीजी इस मंदिर के प्रमुख संरक्षक हैं।

यह मंदिर, बुढाबलंग नदी के पूर्वी छोर पर स्थित है और इसका ढलान नदी की तरफ है, बुढाबलंग नदी की गहराई यहाँ पर १०० फीट है। मंदिर के प्रांगण में प्राकृतिक/नैसर्गिक तरीके से एक बेल का वृक्ष उगा हुआ है जो कि श्री शिरडी साईं के भक्त मेघा का स्मरण कराता है – मेघा जो बाबा को शिव स्वरूप मान, श्री साईं पर रोज बेल पत्र अर्पित करता था।

बारीपदा नगर के ठीक बीच स्थित यह मंदिर, श्री जगन्नाथ मंदिर के समीप है। बस स्टैंड से यह मंदिर ३.५ किलोमीटर और रेलवे स्टेशन से २ किलोमीटर की दूरी पर है।

अन्य साईं मंदिरो की तरह, मंदिर में प्रत्येक दिन चार समय आरती होती है एवं श्री साईं के पूजनार्थ नियमित अन्य कार्य/सेवा अर्चना होती है । आपके मंदिर में श्री शिरडी साईं से जुडे अन्य पावन अवसर जैसे रामनवमी, गुरु पूर्णिमा, दशहरा, महासमाधि भी भक्तिमय वातावरण में , हर्षोउल्लास के साथ,  मनाये जाते हैं। प्रत्येक गुरुवर को संध्या में पालकी यात्रा निकाली जाती है।

आज बारीपदा नगर में आए प्रत्येक आगंतुक, इस मंदिर की सीढीय़ाँ चढ़े बिना और दर्शन किये बिना नहीं जाते। नगर का प्रत्येक वासी , इस मंदिर के दर्शन कर ,अपने आप को धन्य व आनंदित मानता है। १४ अप्रैल २०११ को आपका मंदिर अपनी १०वीं वर्षगांठ मनाएगा।

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