श्र्द्धेय गुरुजी |
संपूर्ण अध्यात्मिक ब्रहमाण्ड में श्री चंद्रभानु सतपथीजी श्रेष्ठतम प्रतिष्ठित अध्यात्मिक सद्गुरु के रूप में विखयात हैं और शिरडी साईं बाबा द्वारा प्रतिपादित मार्ग के साक्षात साईं स्वरूप करुणामयी दिव्य मार्ग दर्शक हैं। सही मायने में अध्यात्मिक मार्ग के पथिक, शिरडी साईं के सच्चे भक्त, इन्हें श्रद्धा पूर्वक नमन् कर पूजनीय गुरुजी में साईं चेतना का प्रखरित स्वरूप की झलक देख, उनसे मार्ग दर्शन प्राप्त कर, साईं धारा से जुड़ गए हैं। आज, देश विदेश में अरबों भक्त पूजनीय गुरुजी को अपना आदर्शस्तंभ एवं सद्गुरु मानते हैं और पूजनीय गुरुजी द्वारा दिखाए साईं मार्ग का अनुसरण कर रहे हैं।
श्री चंद्रभानु सतपथीजी स्वयं को श्री शिरडी साईं का महज एक चाकर मानते हैं – वे शिरडी साईं द्वारा सिखाए गये मानवता के संदेश, जो कि प्रेम, सद्भावना, शुद्ध आचरण, सहिष्णुता, करुणा, सबुरी, श्रद्धा पर आधारित हैं, इनका प्रचार देश विदेश में, जन मानस में करते हैं। पुजनीय गुरुजी श्री शिरडी साईं के अनन्य आत्मज्ञ हैं व अन्य मनुष्यों को शिरडी साईं की राह पर चलने के प्रेरणास्रोत हैं। गुरुजी कहते हैं : ”शिरडी साईं यथार्थ सत्य हैं।”
श्री सतपथीजी की पैतृक पृष्ठभूमि एक संभ्रांत उच्च कुलीन, सांस्कृतिक विरासत में धनी, प्रशासकों एवं साहित्यकारों की है। आपके पिताजी श्री गोकुल चंद्र सतपथी, मयूरभंज महाराजा के शासन काल में, मयूरभंज के महाराजा की शिक्षा के प्रबंधक-संचालक पद पर कार्यरत थे। आपकी आदरणीय माता जी श्रीमती हर्षमयी सतपथी प्रारंभ से ही अत्यंत धर्मनिष्ठ सुग्रहिणी रहीं। श्री गुरुजी का जन्म सन् १९४८ में हुआ व आप अपनी बालावस्था से ही दढ़ धर्मनिष्ठ रहे हैं जो मुल्य-गुण आपने अपने आदरणीय माताजी-पिताजी से आत्मसात/ग्रहण किया। आपने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर पूर्व उपाधि प्राप्त की। आप कुछ समय के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर कार्य रत रहे। तदोपरांत १९७२ में भारतीय पुलिस सेवा में आपका चयन हुआ। आपने भारतीय पुलिस सेवा में अपने कार्यकाल में अनेकों संवेदनशील महत्वपूर्ण कार्यभार संभाले जैसे कि नागरिक उड्डयन सुरक्षा विभाग इत्यादि। आपको भारत सरकार ने आपकी श्रेष्ठ सेवाओं के लिए अनेकों पदक एवं प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया। आप सन् २००८ में महानिदेशक (पुलिस) के पद से सेवा निवृत्त हुए व अभी भारत सरकार के सलाहकार के पद पर कार्यरत हैं। इन सब सरकारी जिम्मेदारियों एवं कर्त्तव्यों के अलावा, आप अपने परिवार व शिरडी साईं के अरबों अनेकों भक्तों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों व कर्तव्यों का बखूबी निर्वाह कर रहे हैं।
सन् १९८९ में श्री गुरुजी प्रथमतः शिरडी साईं द्वारा आकृष्ट हुए और तभी से आप विश्व साईं आंदोलन का नेतृत्त्व कर, शिरडी साईं के मानवता के संदेश का प्रचार-प्रसार देश-विदेश में कर रहे हैं। आप की इस प्रेरणा व मार्ग दर्शन से आज विश्व साईं आंदोलन देश विदेश में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है और अरबों की तादाद में शिरडी साईं से जनसैलाब जुड़ता चला आ रहा है। आपके दिव्य प्रेरणा से विश्व साईं आंदोलन प्रत्येक मनुष्य को अपने भीतर खोजने का मार्ग दिखाता है। गुरुजी चमत्कारों में विश्वास नहीं करते।
श्री गुरुजी की प्रेरणा अनुरूप एवं मार्गदर्शन में देश विदेश में विभिन्न स्थानों में उदाहणार्थ, क्यूबा, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, स्पेन इत्यादि में आज तकरीबन २५० शिरडी साईं मंदिर का निर्माण हो चुका है जो शिरडी साईं के मानवता के संदेश – शुद्ध आचरण, प्रेम, सहिष्णुता, मानवता, श्रद्धा, सबुरी – के प्रसार के केंद्र बिंदु हैं। ये संस्थाएं सामाजिक क्षेत्र में सुधार हेतु कई चैरिटेबल कार्य भी करते हैं उदाहरणार्थ प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़/चक्रवाती तूफान की स्थिति में) के दौरान मदद मुहैया कराना, मुफ्त चिकित्सा सेवा प्रदान करना, मुफ्त शिक्षा के अवसर देना, लंगर लगाना, इत्यादि।
श्री चंद्रभानु सतपथीजी ने १६००० नवाक्षरी छंद में एक बृहद् साहित्यभूषण महाकाव्य ग्रंथ “श्री गुरु भागवत्” की संरचना की है जिसमें गुरु शिष्य परंपरा,सद्गुरु तत्त्व, अध्यात्मिक तत्त्वों, भक्ति इत्यादि के गूढ़ रहस्यों का काव्यात्मक सार है। ओडीआ भाषा में श्री गुरुजी द्वारा लिखित महाकाव्य ग्रंथ “श्री गुरु भागवत्” जनमानस में भक्ति व अध्यात्म चेतना को पहुंचाने का माध्यम है एवं ओड़ीशा के प्रसिद्ध कवि श्री जगन्नाथ दास द्वारा १४वीं-१५वीं शताब्दी में रचित ग्रंथ ‘भागवत’ के समकक्ष है। “श्री गुरु भागवत्” महाकाव्य – प्रथम खंड में ४००० छंद लिपि बद्ध हैं। शिरडी साईं बाबा के ९२वें महासमाधि दिवस के पावन अवसर पर, शिरडी में, इस बृहद् महाकाव्य “श्री गुरु भागवत्”-प्रथम खंड का विमोचन शिरडी साईं बाबा संस्थान, शिरडी, के सभापति ने श्री शिरडी साईं की मूर्ति के सामने, उनके चरणों में अर्पित कर के किया जिसे देखने के लिए संस्थान के समस्त अन्य सदस्य और सैकड़ों भक्त उपस्थित थे। “श्री गुरु भागवत्” महाकाव्य – दुसरे , तृतीय एवं चतुर्थ खंड का विमोचन सन २०११ के उतरार्द्ध में किया गया। प्रत्येक स्कन्द में तक़रीबन ४००० छंद संकलित हैं .अनेकों अमूल ओडिआ निवासी भक्तों एवं जन साधारण के अनुरोध पर मूल ओडिआ महाकाव्य भक्ति ग्रन्थ “श्री गुरु भागवत” के प्रथम खंड के हिंदी अनुवाद का लोकार्पण ४ अक्टूबर २०११ को किया गया ।
”गोप्य रू आगोप्य” ओड़िआ भाषा में , श्री गुरुजी द्वारा रचित गहन अध्यात्मिक ग्रंथ है जो ब्रह्मांड की उत्पत्ति, सृष्टि संचालन के तत्त्व, काल तत्त्व, जीवात्मा का परमात्मा में रूपांतर, प्रकृति के नियम इत्यादि जैसे गूढ़ विषयों पर रोशनी डालता है व अध्यात्मिक उत्थान में रत प्रत्येक मानव को दिशा निर्देश देता है; ”सृष्टितत्त्वानुचिंतनम्” ओड़िआ भाषा में श्री गुरुजी द्वारा लिखित ”गोप्य रू अगोप्य” नामक मूल बृहद् ग्रंथ का संस्कृत रूपांतर/अनुवाद है।
श्री गुरूजी को उनके ओडिआ अध्यात्मिक साहित्य क्षेत्र में उत्कृष्ट कृतियों (“गोप्य रु अगोप्य”, “श्री गुरु भगवत”)के लिए प्रथम “महापुरुष जगन्नाथ दास” सम्मान से समान्नित किया गया है।
श्री गुरुजी ने अंग्रेजी और हिंदी में अनेकों पुस्तकें लिखीं हैं मसलन, ”Shri Shirdi Sai Baba And Other Perfect Masters” , “ Baba May I Answer”, “साईं शरण में”, “श्री शिरडी साईंबाबा एवं अन्य सद्गुरु” इत्यादि। इन पुस्तकों का अनुवाद कई भारतीय भाषाओं में किया जा चुका जैसे कि तेलुगु, मराठी, ओड़िआ, असमिया, गुजराती, बंगला आदि। इन अमूल्य पुस्तकों का विदेशी भाषाओँ मसलन नेपाली, स्लोवाक आदि में भी अनुवाद में भी उपलब्ध है ताकि शिर्डी साईं के वचन एवं तत्वों का प्रचार-प्रसार समग्रः विश्व में हो सके। ये पुस्तकें अध्यात्मिक पथ के पथिक का मार्गदर्शन कर, उनकी जिज्ञासाओं को सुलझाती हैं व पथ में मिलने वाले समस्याओं, भौतिक समस्याओं, अध्यात्मिक जिज्ञसा/प्रश्नों को सटीक सरल भाषा में समझाती हैं।
श्री गुरुजी ने संगीत कला को विस्तृत रूप से शिरडी साईं तक पहुँचने के लिए भक्ति का माध्यम बनाया व प्रयोग किया है। फलतः टाइम्स म्यूजिक, इंडिया , समूह द्वारा “Living with Sai” (साईं के साथ) और ”तुभ्यम् नमामि्” (साईं महामंत्र) नामक हिंदी भाषीय आडियो सीडी को जारी किया गया – देश विदेश के सभी साईं भक्तों एवं संगीत परखी प्रेमियों ने इन दोनों ऑडियो सीडी के कर्ण प्रिय अंर्तमन को छू लेने वाले मधुर शब्दों को, संगीत को प्रचुर मात्रा में सराहा है। “Living with Sai” (साईं के साथ) के शब्द और संगीत दोनों श्री गुरुजी द्वारा रचित हैं; देश की जानी मानी गायक (गायिकाओं) जैसे कि सुरेश वाडकर, साधना सरगम व इतर गायकों ने इस एलबम को अपनी आवाज से मुखरित किया है। ”तुभ्यम् नमामि्” के गीतकार, संगीतकार एवं गायक स्वयं श्री गुरुजी हैं। ”तुभ्यम् नमामि्” मूलतः शिरडी साईं की स्तुति/स्तव्गान है जो कि देश विदेश में अनेकों साईं मंदिर में शिरडी साईं के आशीष आवाहन् हेतु प्रथम गायी जाती है। श्री गुरूजी द्वारा संगीतबद्ध, रचित एवं निर्देशित भजम एल्बम CD “AAO SAI” का विमोचन , दिनांक १३ जनवरी २०११ को श्री गुरूजी के कर कमलों से हुआ , जो की टाइम्स म्यूजिक समूह की प्रस्तुति है | इस रूहानी भजन संग्रह में नामी गायक / गायिकाओं मसलन श्रेया घोषाल,शान , शंकर महादेवन , शिल्पा राव , रेखा , मोहित ,इत्यादि की मधुर आवाज़ , श्री गुरूजी के चैतन्य बोलों को आपकी अंतरात्मा में बसा , भक्तों को इश्वर की तरफ आकृष्ट करते हैं | इसके अलावा “Sai Melodies” नामक म्यूजिक CD को भी अमेरिका में जारी किया गया |
हाल ही में , ४ अक्टूबर २०११ को RPG-गोयनका समूह द्वारा सयंत सा-रे-गा-मा म्यूजिक कंपनी( जो पहले HMV के नाम से जानी जाती थी) द्वारा निर्मित शिर्डी साईं मंत्र म्यूजिक CD “श्री साईं नाथाय नमः नमः” को जारी किया गया ; इस म्यूजिक CD में श्री साईं नाथ पर आधारित चार मंत्र हैं एवं समस्त मंत्र संग्रह के अति मधुर, कर्णप्रिय विस्मृत करने वाले बोल – संगीत को स्वर, संगीत एवं शब्द स्वयं श्री गुरूजी चन्द्रभानु सतपथीजी ने प्रदान किये हैं | “ श्री साईं नाथाय नमः नमः” को श्री शिर्डी साईं मंदिर, शिर्डी में , शिर्डी संसथान ट्रस्ट के अधिकारी एवं सदस्यश्री मोरे, श्रो शेलके आदि ने श्री शिर्डी साईं के चरणों में ३ अक्टूबर २०११ को अर्पण किया |
श्री गुरूजी को उनके दिव्य संगीत- गीत संरचनाओं व् दिव्य सुरीली स्वर में बद्ध भावात्मक गीतों के लिए ” दिव्य संगीत शिरोमणि “ उपाधि से नवाज़ा गया ।
श्री जगन्नाथ प्रभु की भक्ति में श्री गुरुजी ने अनेकों भक्ति गीतों की संरचना की है। इनमें से कुछ गीत ”श्री जगन्नाथ महिमा” नामक ऑडियो सीडी में संगीतबद्ध कर संकलित किये गए हैं। उड़िया भाषी सीडी ”श्री जगन्नाथ महिमा” को देश विदेश के सभी श्री जगन्नाथ प्रभु के भक्तों ने बहुत सराहा है। इनके अलावा, कई हिंदी ऑडियो कैसेट – जिनके गीतकार व संगीतकार स्वयं श्री गुरुजी हैं – जैसे कि ”साईं संगीत”, ”प्रीत साईं के लिए”, ”साईं का बंदा” इत्यादि भी उपलब्ध हैं जो शिरडी साईं के संदेश को जनमानस तक पहुंचाते हैं और उन्हें शिरडी साईं के दर्शन हेतु, प्रेरणा देते हैं।
श्री शिरडी साईं बाबा के जीवन, मानवता के संदेश, वचनामृत को घर-घर जनमानस तक पहुंचाने के लिए, श्री गुरुजी के प्रेरणा, दिशा निर्देश एवं संरक्षण में अनेकों वेबसाइटें कार्यान्वित हैं – जैसे कि www.shirdibaba.org , www.heritageofshirdisai.org , www.saibabaofshirdi.net इत्यादि । अनेकों अध्यात्मिक अंक/पत्रिकाएं जैसे कि “Heritage of Shirdi Sai”, ‘साईं कृपा’, ‘साईं बाबा दर्शन’, ‘साईं वानी’, ‘साईं छाया’, ‘साईं प्रसाद’, ‘नुआ जिबनर संधान-साईं निर्मलय’, ‘साईं किरनालु’ इत्यादि आज, श्री गुरुजी के मार्ग दर्शन में, शिरडी साईं के संदेश के प्रसार में संलग्न हैं ताकि शिरडी साईं का मानवता का संदेश घर घर पहुंच कर, संपूर्ण विश्व को ‘वसुधेव कुटुम्बकम’ के वस्तुतः रूप में परिणित करे।
१० नवम्बर २०११ को , नई दिली में आयोजित सांस्कृतिक अनुष्ठान में श्री गुरूजी के बहुआयामी विस्तृत सामाजिक विकास कार्यक्षेत्र ,सामाजिक उत्थान , कला -संगीत-साहित्य , लोकोपकारी मानवता से जुड़े कार्यक्षेत्र में उनके बृहत् उत्कृष्ट योगदान के मध्येनज़र और सराहना में भारत के सर्वोच्च न्यालय के माननीय न्यायमूर्ति श्री अनंग कुमार पटनाइक महोदय द्वारा पूजनीय गुरूजी श्री चन्द्र भानु सतपथीजी को “ओडीशा रत्न ” उपाधि से विभूषित कर , अपार जन समूह समक्ष अभिनन्दन किया गया।
श्री गुरुजी , शिरडी साईं के अनन्य आत्मज्ञ भक्त एवं चाकर हैं जिन्होंने अपना सर्वस्व, समस्त जीवन शिरडी साईं के मानवता, सहिष्णुता, प्रेम, शुद्ध आचरण, श्रद्धा, सबुरी के संदेश के प्रचार-प्रसार में समर्पित कर दिया है। श्री गुरुजी का जीवन सही मायनों में प्रत्येक साईं भक्त के लिए जीवंत उदाहरण है कि मनुष्य भौतिक दुनिया के माया जाल में रहते हुए भी अध्यात्मिक चेतना के उच्चत्तम शिखर तक पहुँच सकता है। वे सभी साईं भक्तों का मार्ग दर्शन कर उन्हें ”श्री साईं सत् चरित्र” का नियमित पाठ करने की सीख देते हैं। उनके सटीक भविष्यवेत्ता होने का लाभ अनेकों भक्तों ने प्राप्त किया है व दुष्कर स्थितियों से असंखय भक्तों का बचाव हुआ है।
श्री गुरुजी अपने दिन का मुख्य समय, भक्तों से मिलने में, उनकी अध्यात्मिक जिज्ञासा के मार्गदर्शन (देने) में, उन्हें भौतिक समस्याओं इत्यादि से दृढ़ सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण एवं साईं चेतना से प्रेरित आत्म विश्वास से मुकाबला करने में, अध्यात्मिक चेतना एवं साईं मार्ग के आधार – शुद्ध आचरण, मानवता, श्रद्धा, सबुरी – को अपनाने का पथ समझाते हैं, जिससे कि मानव अपने जीवन को साईं चेतना के रंग में – शुद्ध आचरण, मानवता, सकारात्मक दृष्टि के रंग में , स्फूर्ति उमंग से, अपने जीवन के सच्चे लक्ष्य को पा सके, साईं के साथ।
साईं भक्त प्रायः आप को अपना सद्गुरु, माता, पिता, भाई, सखा के रूप में देखते हैं एवं आपसे आशीष, मार्ग दर्शन ग्रहण करते हैं। सैकड़ों साईं भक्त आपको साक्षात दिव्य साईं करूणामयी स्वरूप मानते हैं। आप का सर्वस्व एवं पहचान शिरडी साईं बाबा और भक्तों की सेवा (में समर्पित) है।
|| गुरु ब्रह्मा गुरुर विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः , गुरु साक्षात पारब्रह्म, तस्मय श्री गुरुवे नमः||
||आपके चरण कमलों में हमारा कोटि् कोटि् सादर प्रणाम एवं चरण वंदना||
आपका आशीष सदैव हमारे साथ रहे
श्री शिर्डी साईंबाबा |
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श्री गुरूजी |
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श्री शिर्डी साईं पीठ,बारीपदा |
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श्री शिरडी साईं बाबा – एक फकीर, जो कि अहमदनगर जिले के शिरडी नामक एक छोटे से गांव में अवत्तीर्ण हुए ,शिरडी साईं बाबा के पैतृक
श्री चंद्रभानु सतपथीजी स्वयं को श्री शिरडी साईं का महज एक चाकर मानते हैं - वे शिरडी साईंबाबा के द्वारा सिखाए गये मानवता
१४ अप्रैल २००१ के दिन पूजनीय गुरुजी ने, बारीपदा (उड़ीसा) में , श्री शिरडी साईं पीठ मंदिर का उद्घाटन किया। इससे पहले,