शिरडी में महत्त्वपूर्ण स्थल |
खंडोबा मंदिर : यह स्थान श्री साईंनाथ अस्पताल के समीप है। बाबा जब शिरडी में चांद पाटिल के भतीजे के शादी की बारात के साथ आये, तो यहीं, खंडोबा मंदिर के पुजारी महलासपति ने उन्हें ”या साईं’ कह संबोधन कर, उनका स्वागत किया।
गुरुस्थान मंदिर : यह वही स्थान है , जहां शिरडी साईं प्रथम बार १६ वर्ष के आयु में , दुनिया के लोगों को नजर आए। यह श्री साईं बाबा के गुरु का स्थान माना जाता है व अपने प्रसिद्ध नीम के पेड़ के लिए मशहूर है। भक्तों का मानना है कि गुरुवार और शुक्रवार को यहां धूप दिखाने से उनके कष्टों का निपटान होता है।
साईं बाबा का समाधि मंदिर : इस पवित्र स्थल में बाबा की समाधि है जहां श्री साईं बाबा विराजमान हैं। बाबा द्वारा उनके जीवन काल में प्रयोग में लाई गईं समस्त वस्तुएं, इस मंदिर के विशेष कक्ष में भक्तों के दर्शनार्थ रखीं हैं। बाबा का नियमित पद्धति से अभिषेक , पूजा एवं दिन में चार बार आरती की जाती है। वास्तविक रूप में, नागपुर के प्रमुख मालगुज़ार श्रीमंत गोपाल राव बूटी, समाधि मंदिर (जो पहले बूट्टी वाडा से जाना जाता था) यहां एक मुर्लिधर का मंदिर बनाना चाहते थे। अद्भुत तरीके से ,श्री स्वयं यहां , समाधि मंदिर में विराजित हैं जिसके चारों तरफ ,संगमरमर की महीन नक्काशीदार जाली है। बाबा की दिव्य मूर्ति १९५४ में, शिल्पकार स्वर्गीय बालाजी वसंत द्वारा, इटैलियन संगमरमर से निर्मित है। समाधि मंदिर में ६०० भक्तों के लिए सभागृह है । मंदिर के प्रथम तल में बाबा के जीवनी को दर्शाते, जीवन प्रसंग से संबंधित चित्र लगे हैं। समाधि मंदिर प्रति दिन प्रातः ६ बजे खुलता है व रात्रि को १० बजे से आरती के साथ मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं।
द्वारकामाई (मस्जिद): बाबा इस स्थान पर ६० सालों तक रहे। असंखय भक्तों ने इसी स्थान पर, बाबा के जीवन काल में ,यहां उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। वह पत्थर की शीला, जिस पर बाबा अक्सर बैठते थे, समीप ही रखी हुई है। बाबा द्वारा प्रज्ज्वलित धूनी आज भी यहां , वैसे ही , प्रज्ज्वलित है। बाबा अपने भक्तों को उनकी समस्याओं के समाधान हेतु उदी (धूनी) देते थे । आजकल धूनी से निकली राख/अंगार को उदी के रूप में वितरित किया जाता है । बाबा इसी स्थान पर, अपने भक्तों के लिए भोजन बनाते थे। इस स्थल पर बाबा की रखी गई जीवंत चित्र का विशेष महत्व है, जो कि बाबा के जीवन काल में बनाई गई थी।
चावडी : बाबा अपने जीवन काल में, हर दूसरे रात के समय, द्वारकामई से चावडी तक एक जलसेनुमा जुलूस में भक्तों संग जाते, और चावडी में ही विश्राम कर, रात्रि को निद्रा करते। अब प्रत्येक गुरुवार को रात्रि ९.१५ बजे से १०.०० बजे के बीच यहां से (द्वारकामाई से चावडी तक) पालकी यात्रा निकाली जाती है व पालकी में श्री साईं की तसवीर, उनका सटका एवं पूजनीय पदुकाएं रखी जाती हैं। चावडी के दो विभाग हैं – एक भाग में शिरडी साईं द्वारा उपयोग में लायी गई कुर्सी है एवं चावडी के दूसरे भाग में बाबा की बड़ी तस्वीर, लकड़ी के पलंग के साथ रखा हुआ है। भक्तों को कतार बद्ध तरीके से ही समाधि मंदिर, द्वारकामई और चावडी के दर्शन प्राप्त होते हैं।
लेंडी बाग : गुरुस्थान से कुछ ही दूरी पर, लेंडी बाग नामक बगीचा है। इस बगिया को स्वयं बाबा ने अपने हाथों से बनाया है – वे इसे प्रतिदिन सींचते थे। लेंडी बाग का नाम इसके, उस समय के काल में, बगल से हो के गुजरने वाले नाला से पड़ा- बाबा यहां प्रत्येक दिन, सुबह एवं अपराह्न में आते और नीम के वृक्ष के नीचे आराम फरमाते। बाबा ने नीम के वृक्ष तले २ फीट का गड्ढा खोदा और एक सदैव जलता हुआ दिया रखा। आज कल, इस दिये को रखने हेतु एक अष्टकोणी संगमरमर का दीपगृह बनाया गया है और इस निरंतर जलते हुए दिये को आप दीपगृह की कांच के दीवार में से देख सकते हैं। नंदादीप के एक ओर पर पीपल का वृक्ष है और दूसरे छोर पर नीम का वृक्ष।
अन्य स्थल : शिरडी साईं बाबा संस्थान के प्रांगण में ही, लेंडी बाग के समीप, शिरडी साईं के जीवन काल में उनसे जुड़े अंतरंग भक्त श्री तत्या पाटिल कोटे, श्री भाउ महाराज कुम्भार, श्री वी. पद्मनभा अययर , श्री नानावाली और श्री अब्दुल बाबा की समाधि स्थित है। इसके अलावा, बाबा के भक्त महलसापति, बायजा मां, श्यामा, (माधोराव देशपांडे), लक्ष्मीबाई शिंदे के गृहस्थान भी , दर्शनार्थी जाते हैं। नंदादीप के समीप , श्री दत्तात्रेय का छोटा सा मंदिर लेंण्डी बाग में है । शिरडी साईं का प्रियः अश्व ‘श्यामा कर्ण’ की समाधि भी यहीं है। यहां एक कुंआ भी है जिसे ‘बाबा की बावड़ी’ कहते हैं।
इसके अलावा, संस्थान परिसर में तीन अन्य मंदिर विराजमान हैं : १. श्री गणेश मंदिर, २. श्री शनि मंदिर और ३. श्री महादेव मंदिर।
निकटवर्ती दर्शनीय स्थल :
शिरडी से ५ किमी. की दूरी पर, सकोरी नामक स्थान है जो कि श्री उपासनी महाराज की तपोभूमि है।
शनि शिंग्नापुर शिरडी से ७० कि.मी. की दूरी पर है जहां शनि देव का प्रखयात मंदिर स्थित है।
सप्तशृंगी देवी का मंदिर भी यहीं, नासिक के नजदीक स्थित है, जो कि एक शक्तिपीठ है।
श्री शिर्डी साईंबाबा |
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श्री गुरूजी |
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श्री शिर्डी साईं पीठ,बारीपदा |
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श्री शिरडी साईं बाबा – एक फकीर, जो कि अहमदनगर जिले के शिरडी नामक एक छोटे से गांव में अवत्तीर्ण हुए ,शिरडी साईं बाबा के पैतृक
श्री चंद्रभानु सतपथीजी स्वयं को श्री शिरडी साईं का महज एक चाकर मानते हैं - वे शिरडी साईंबाबा के द्वारा सिखाए गये मानवता
१४ अप्रैल २००१ के दिन पूजनीय गुरुजी ने, बारीपदा (उड़ीसा) में , श्री शिरडी साईं पीठ मंदिर का उद्घाटन किया। इससे पहले,