आवास सुविधा |
शिरडी संस्थान द्वारा देश विदेश के कोने कोने से आने वाले, करीबन ४०,००० भक्तों को रहने की सुविधा दी जाती है। भक्तों की बढ़ती भीढ़/संखया को देखते हुए संस्थान द्वारा, भक्तों के ठहरने की व्यवस्था करने हेतु २५ एकड़ के भूमि क्षेत्र में एक अन्य आश्रम परिसर का निर्माण कार्य भी आरंभ किया जा चुका है जिसमें १५०० कमरे एवं २००० हाल होंगे , जो कि करीबन १५००० भक्तों के ठहरने के लिए पर्याप्त होंगे।
संस्थान द्वारा संचालित विश्राम गृह /भक्त निवास के अलावा, निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित शिरडी में अनेकों लॉज/होटल/धर्मशालाएं भी उपलब्ध हैं जो विभिन्न श्रेणी के/वर्गों के भक्तों के सुविधानुसार, विभिन्न कमरों में ठहरने की व्यवस्था करते हैं। सामान्य दिवसों में, रहने के लिए होटल, धर्मशाला इत्यादि में कमरे मिल जाते हैं। किंतु, विशेष पर्व जैसे कि गुरु पूर्णिमा, दशहरा, राम नवमी इत्यादि अवसर पर आपको अपनी सुविधा के लिए, अपने ठहरने की व्यवस्था/कमरों का आरक्षण काफी पहले कर लेना चाहिए ताकि आपको असुविधा न हो।
खान-पान :
सन् १९८० में, महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्य मंत्री श्री शंकर राव चौहान ने शिरडी साईं बाबा संस्थान शिरडी द्वारा निर्मित साईं प्रसादालय-१ का उद्घाटन किया था। इसी तर्ज पर, ८/१/२००९ को , भारत की राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा सिंह पाटिल ने ,रिमोट कंट्रोल का बटन दबा कर, साईं प्रसादालय का उद्घाटन किया जो कि अति आधुनिक, सौर उर्जा यंत्रों से संचालित एवं युक्त है। इस प्रसादालय को बनाने में अभी तक ४० करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इस बड़े प्रसादालय में एक साथ ५००० भक्तों को भोजन कराने की व्यवस्था को ५५० सहायक सुचारु रूप से चलाते हैं और यह प्रसादालय ,सुबह ७ बजे से ले कर रात्रि के ११ बजे तक , खुला रहता है। भक्तों को अत्यंत साधारण से शुल्क में (जो कि अभी सिर्फ ५ रुपये है) की दर से स्वच्छ , स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
यह प्रसादालय ७ एकड़ में फैला है और सौर यंत्रों से युक्त है व इसमें संस्थापन हेतु तकरीबन ३६,९५,१२८ रुपये की मशीन का आयात की गईं और ६२,५९,०५६ रुपये की मशीनें देश में विभिन्न कोनों से मंगवाई गईं। इन आयातित मशीनों के सीमा शुल्क के निपटान हेतु एवं संस्थापन हेतु ५,५०,००० रुपये का व्यय हुआ।
भोजन प्रसाद हेतु सब्जी, प्याज, आलू, दालों, गेहूं, आटा, घी, तेल इत्यादि की खरीद रहाता, कोपरगांव, पुना, नासिक एवं अन्य स्थानों से की जाती है जो शिरडी तक टेंकर में लाए जाते हैं। सामान्य दिनों में, एक समय तकरीबन ४०,००० से ५०,००० भक्तों के लिए भोजन प्रसाद बनाया जाता है ; उत्सव/पर्व/विशेष पर्वों के दौरान भक्तों की संखया १ लाख से अधिक हो, भक्त भोजन प्रसाद ग्रहण करते हैं।
सब्जियों की सफाई कटाई मशीनों द्वारा संचालित है – जैसे कि प्याज काटने की मशीने, आलू, छीलने के यंत्र, बर्तन धोने के यंत्र, सौर उर्जा द्वारा संचालित यंत्र, वगैरह वगैरह। सौर कूकर मशीनों द्वारा १००० भक्तों के लिए पर्याप्त चावल तकरीबन २५ मिनट में तैयार किया जाता है। इस प्रसादालय को भारत सरकार के खाद्य एवं दवाई विभाग द्वारा प्रशंसा पत्र भी मिले हैं। जो भक्त , प्रसादालय में मुफ्त भोजन कराने हेतु दान राशि देना चाहते हैं, वे संस्थान के कार्याध्यक्ष से मिलें।
श्री शिर्डी साईंबाबा |
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श्री गुरूजी |
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श्री शिर्डी साईं पीठ,बारीपदा |
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श्री शिरडी साईं बाबा – एक फकीर, जो कि अहमदनगर जिले के शिरडी नामक एक छोटे से गांव में अवत्तीर्ण हुए ,शिरडी साईं बाबा के पैतृक
श्री चंद्रभानु सतपथीजी स्वयं को श्री शिरडी साईं का महज एक चाकर मानते हैं - वे शिरडी साईंबाबा के द्वारा सिखाए गये मानवता
१४ अप्रैल २००१ के दिन पूजनीय गुरुजी ने, बारीपदा (उड़ीसा) में , श्री शिरडी साईं पीठ मंदिर का उद्घाटन किया। इससे पहले,